#5 April 2020 lock down - News Beyond The Media House

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Sunday, April 5, 2020

#5 April 2020 lock down

सुभसंध्या दुस्तो !


आज रात ९ बजे की तैय्यारी कर ली की नही....? अरे नहीं नहीं मैं Party-शार्टी की बात नहीं कर रहा....मैं तो राष्ट्रिय स्तर पर दिये जलाने की बात कर रहा हुँ !


दुस्तो ये जो अपना युरेशियन प्रधानमंत्री है ना वो बडा ही चतुर है। वैसे तो मेरे जैसे युरेशियन दुस्तो ने समय-समय पर प्रधानमंत्री मोदी जी का विरोध भी किया है और आगे भी उनके हर एक गलत कार्यों पर हमारा विरोध जारी ही रहेगी क्योंकी काम अच्छा होगा तो प्रशंशा होगी और हिंदु-विरेधी काम होगा तो विरोध अवश्य होगा....!

Secular दुस्तो दिमाग में कोई भी गफलत न पाले और आज रात ठिक नौ बजे घर के मुख्य दरवाजे पर और घर की हर छोटी-बडी खिडकी, झरोखो और दालानों पर दिपक जरूर-जरूर और जरूर जलाएँ....!

दुस्तो परसो से बहुत सारे भक्त लोग प्रधानमंत्री के दिपक जलाने के अनुरोध के पीछे तरह-तरह के तर्क-कुतर्क दे रहे हैं। ९ अंक, ९ बजे, ९ मिनट, पाँच तारिख और चौथा महिना मतलब ५+४ अर्थात ९, मंगल और न जाने क्या-क्या....

कुछ तो एकदम सच है लेकिन कुछ को तो मैं अंध-भक्तई ही कहुँगा। हमें भक्त होने का गर्व होना चाहिए लेकिन मैं भक्त दुस्तो से केवल इतना कहुँगा की जिस चीज को आप Scientifically Justify नही कर सकते उस तरह के post कृपया न डालें क्योंकी इस तरह के चुतियापे से ही तुम भक्त से अंधभक्त की category में आ जाते हो और तार्किक दृष्टी से सक्षम वामपंथी और Secular's के सामने भिगी बिल्ली की तरह मिमियाने लगते हो। इसलिए उतना ही हगो जितना साफ करने के लिए तुम्हारे पास पानी और साबुन हो अन्यथा गंध ही मारोगे।



चलो दुस्तो इस पर मैं अपने विचार रखता हुँ और हाँ ये विचार मेरे अपने हैं और आपको शायद ही किसी फेसबुक, Whatsapp, Google या YouTube पर ये विचार मिलेंगे।


यदि आप धनवान हो तो देसी गाय के घी का सेवन करके कई रोगो से स्वयं को बिना दवा-दारू किये ही बचा सकते हो लेकिन यदि आप मध्यम वर्ग के परिवार से हो तो देसी गाय का महँगा घी खाना आपके लिए कठिन होगा तो ऐसा क्या करें की कम budget में आपका काम बन जाएँ ?

दुस्तो आपको यदि पता नहीं तो मैं बताता हुँ की शास्त्रो में गरिबो को शारीरिक एंव आध्यात्मिक पुष्टता देने का भी एक वैज्ञानिक नियम है। इसके लिए आपको केवल सुबह और शाम देसी गाय के घी का एक दीपक अपने देवस्थान पर जलाना होगा। जैसा की ऊर्जा का नियम है की वो कभी विलुप्त नहीं होती केवल एक ऊर्जा से दुसरी ऊर्जा में परिवर्तित होती रहती है तो ऊर्जा के यही नियम के अनुसार घी का दीया आपके एंव आपके परिवार के प्रत्येक सदस्यो के सूक्ष्म-शरीर को पुष्टता प्रदान करेगा और शारीरिक एंव आध्यात्मिक लाभ देगा।


आपके परिवार का कोई सदस्य अमेरिका में हो और कोई लंदन में हो तब भी ऊर्जा का नियम काम करेगा और वें जहाँ पर भी हो इस अलौकिक ऊर्जा की तपिश उनके सूक्ष्म शरीर को उष्णता प्रदान करेंगी।

Modern Science की Quantum Theory में प्रोटान-न्युट्रॉन-इलेक्ट्रॉन भी ऐसे ही react करते हैं।


सूक्ष्म-शरीर को जो लोग आत्मा, रूह या Soul समझ रहे हैं तो वें बिल्कुल भी गलत है। सूक्ष्म शरीर आपकी आत्मा पर चढा एक और आवरण होता है और उसके ऊपर आपका वर्तमान में चढा यह शरीर होता है। किसी भी साधारण बिमारी से लड़ने के लिए आपके शरीर का स्वस्थ होना जरूरी है लेकिन किसी भयंकर बिमारी से बच पाना किसी औषधी पर नही बल्कि आपके सूक्ष्म शरीर की स्थिती एंव स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।

आपका सूक्ष्म शरीर यदि जीना चाहे तो वो बचने के लिए लड़ता है अन्यथा surrender कर देता है बस इसी को will power या "आत्मबल" कहते हैं। कैंसर, टीबी, HIV जैसे लाईलाज बीमारी की आप कितनी ही दवा-दारू कर लो लेकिन जब तक आपकी will power मजबूत नही होगी तब तक कोई भी दवा आप पर ज्यादा असर नही करेगी।


आज रात ९ बजे ९ मिनट के लिए घर की सारी बत्तियों को गुल कर दीपक जलाने के लिए प्रधानमंत्री का निवेदन इसी बात पर इंगित करता है की वें राष्ट्र की will power को कोरोना से लड़ने के लिए जागृत करना चाहते हैं।

आपको पता होगा की घर के बल्व, ट्युबलाईट काफी हद तक कुछ-न-कुछ Radiations छोडते हैं जो की सूक्ष्म शरीर को काफी हद तक damage करते हैं तो यदि १३५ करोड़ भारतिय एक ही समय ९ मिनट के लिए अपने घर की lights बंद कर देंगे तो पूरे भारत के मनुष्यों के सूक्ष्म शरीर को recover के लिए एक समय मिल जाएँगा।

ध्यान रखिए सूक्ष्म शरीर के लिए केवल ९ मिनट भी ९ वर्ष के समान हो सकता है बशर्ते समय, नक्षत्र एंव कालगणना का योग सटीक होना चाहिए।


वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यदि मैं इसे समझाने गया तो आधो को तो bouncer ही जाएँगा और आधे जो थोडे-बहुत समझने योग्य है उनको मेरी हिंदी पढ़कर साँप सुँघ लेगा क्योंकी बचपन से दिमाग में अंग्रेजी वाला कचरा जो भरा गया है। इसलिए इन बातो को बताने के लिए ऋषियों ने आध्यात्मिक तरिका अपनाया था लेकिन आज Western Culture की गंध सुँघने का आदी हो चुका भारतिय तो आध्यात्म को अंधविश्वास ही मानता है।

ऐसे मार्कसवादी और लेनिन की विष्ठा से निर्मित दिमाग रखने वाले लोग क्या समझे की तुलसीदास नें हनुमान चालिसा की चौपाईयों में पृथ्वी से सूर्य की दूरी को केवल इसी “दीया-बाती वाली therapy”
से जानी थी क्योंकी उस जमाने में न तो NASA था और न ही ISRO था।



जुग सहस्र जोजन पर भानू।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।



सूक्ष्म शरीर को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जानना है तो आपको Quantum Theory को समझना होगा। सभी पढे लिखे लोग सोचेंगे की ये तो बहुत बढिया है की किसी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किसी भूत-प्रेत, आत्मा-रूह या शरीर और सूक्ष्म शरीर को समझा जाएँ। लेकिन जब इस कॉन्टम के सिद्धांत समझना चाहोगे तो तुम्हारी भिंगरी ही घूमने लगेगी।

लोगो की नजर में सबसे महान वैज्ञानिक “Albert Einstein” थे लेकिन इस कथित scholar नें भी Quantum Theory को गलत तरीके से prove किया और उन की मौत के लगभग 100 साल बाद सामने आया की आईन्स्टाईन Quantum के सिद्धांत पर पूरी तरह से गलत था और गलत भी 19-20 नहीं बल्कि पूरब और पश्चिम जितना गलत।

तो भैय्या अगर रात नौ बजे दीया जलाने का वैज्ञानिक कारण जानना हो तो पढो Quantum Theory को और बन जाओ आईन्स्टाईन....!


यदि आसान भाषा में इसे समझना है तो आज रात आध्यात्म को पूरे ब्रह्मांड में महसूस करों। पिछली बार करोडो लोगों ने मोदी जी के कहने पर घर में शाम 5 बजे थाली, ताली, घंटियाँ व शंख बजाएँ और इस ब्रह्मांड में एक ध्वनी ऊर्जा को प्रवाहित किया और ये ऊर्जा अनंनतकाल के लिए उनके “विराट स्वरूप” (The Higher Cell) से जुड गया और अब समाज कल्याण के उद्देश्य से निर्माण की गई यह ऊर्जा समय-समय पर परिस्थिती के अनुरूप परिवर्तित होकर उनके निर्माता याने आपको सदैव सुख देगी। यही कॉन्टम का सिद्धांत भी सिद्ध करता है। ठिक इसी तरह आज रात जो भी दीपक जलाकर इस “सामूहिक प्रकाश पर्व” में प्रकाश ऊर्जा निर्माण का कारक होगा उनको भी वर्तमान में सूक्ष्म-शरीर के स्वास्थ्य का लाभ होगा और भविष्य में अनंतकाल के लिए जन्म-जन्मांतर तक यह ऊर्जा पोषित करती रहेगी।


तो चलो आईये मित्रो अपने दिमाग से सारी आधुनिकता का कचरा निकाल कर आज रात ठिक ९ बजे विश्व कल्याण के लिए इस मंत्र के साथ गाय के देसी घी अथवा सरसो अथवा किसी भी साधारण से नारियल या अन्य तेल का दीपक जलाएँ और कोरोना से एक साथ मिलकर लडे व अखंड भारत की स्थापना का संकल्प ले....

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तुमा कश्चिदु:खभाग्भवेत्।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥



१३५ करोड में से यदि मुल्ले, ठुल्ले भिमटे, चिमटे, दलित, ब्राह्मण, चोर, चमार, काँगिये, वामपंथी, Seculars, आपिये, पापिये और सारे चूतिये निकाले तब हम लगभग ७०-७५ करोड हिंदु बचेंगे।

आज हम हिंदुओं को जातिवाद, पार्टिवाद, परिवारवाद, भाषावाद, प्रांतवाद से ऊपर ऊठकर एक साथ “हिंदु राष्ट्रम्-श्रेष्ठ राष्ट्रम्-अखंड राष्ट्रम्” का संकल्प लेना है और दिखा देना है दुनिया को की भारत “विश्व-गुरू” बनने जा रहा है....हरामखोरों रोक सको तो रोक लो अपने बाप को....


!! वंदे मातरम् !!


मित्रो आज न कोई उच्च कुलिन ब्राह्मण बौठियाल है और न ही कोई डूम-चमार, न कोई जाधव है न कोई यादव है, न कोई पासवान, पासी, सरोज या धोबी, न कोई ठाकुर, शुक्ला, तिवारी या मिश्रा है, न कोई गुप्ता-बनिया, न कोई तागडे-बंजारी है, न कोई शिंदे-घाटी है।

आज न कोई मराठी है, न कोई भैय्या, न कोई बिहारी है और ना ही कोई जाट, ना गढवाली और गुजराती, ना बंगाली और ना मारवाडी और नही कोई मद्रासी है।

आज हम सब पहले केवल हिंदु है और फिर एक भारतिय....


आज की शाम इतिहास में अमर होगी और हम सब इसके साक्षि होंगे। पूरी दुनिया देखेगी हिंदुओं के आध्यात्म की शक्ती और कोरोना जैसे रक्तबीज के नाश को।

।। जयते जयते हिंदु राष्ट्रम् ।।


Writer :- Vikas Bounthiyal
Edited by :- NA
Source of article :- NA 
Source of video and images :- Self Clicked
Length of the article :-1482 Words (Calculated by wordcounter.net)




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