नवरात्री विशेष ! - News Beyond The Media House

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Sunday, September 29, 2019

नवरात्री विशेष !

।। नवरात्री विशेष ।।

मैने कल देवी के कुछ १८ मंत्रों को अर्थो सहित पढ़ा। इन १८ मंत्रों में से २ मंत्र ऐसे थे जो की मुझे बहुत अधिक जँचे और पसंद आएँ। जैसा की मैं चीजों को अपने तरिकों से समझता हुँ तो इन मंत्रों को मैंने अपने विचारों से समझा और इन मंत्रों को मेरे शब्दों में अनुवाद भी किया। आप चाहे तो मेरे Favorite इन दोनों देवी के मंत्रों को और उनके मतलब को मेरे शब्दों में पढ़ सकते हैं। मुझे आशा है की कोई भी प्रज्ञात पंडित आपको इन मंत्रों का अर्थ इतनी सरल भाषा में नहीं समझा पायेगा।

पहला मंत्र 
या देवी सर्वभूतेषू जाति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थ :- जाति, वर्ण, जन्म, आकार, प्रकार, कर्म, वचन, चेष्टा, बुद्धी, विवेक, मन, शरीर, सभी प्रकार के प्राणियों व वस्तुओं तथा लौकिक, अलौकिक व पारलौकिक सभी प्रकार की शक्तियों में से जिन किसी के भी मूल कारण में देवी है उनको मेरा बारंबार नमस्कार है।

प्रार्थना :- हे जगत्-जननी माँ विधर्म से लड़ने का कारक, चाहे वो धन हो या वैभव हो उसे मुझमें सदैव बनाएँ रखना। 

दूसरा मंत्र 
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थ :- चाहे धरती पर पनपने वाले Bacteria, Fungus, Germs या Amoeba जितने छोटे जीव हो, चाहे समुद्र में Whale fish जितना बडा कोई जीव हो, चाहे प्राणियों में बोलने और अपनी रक्षा करने में असमर्थ कुत्ते-बिल्ली हो या अपनी रक्षा करने में समर्थवान मनुष्य हो, दुष्ट और शैतान विधर्मी हो अथवा देवतुल्य सनातनी मानव हो, इन सभी प्रकार के जीवों में प्रवाहित प्राण रूपी चलायमान ऊर्जा के कारक जगत्-जननी माँ को बारंबार मेरा नमस्कार है।

प्रार्थना :- ऊर्जा में मन:शक्ती, बाहुबल या वैभवशक्ती हो, हे माँ धरती से विधर्म को समाप्त करने की सभी प्रकार की ऊर्जा मेरी अंतिम साँस तक मुझमें बनाएँ रखना और प्रकृती में पुन: कभी भी मेरे जन्म की कोई योजना बनें तो मुझे इसी इच्छा शक्ती के साथ इस धरा पर भेजना। 




मेरे विचार हमेशा पवित्र होते हैं या हमेशा सही और त्रुटिरहित होते हैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है और ऐसा भी नहीं है की मैं हमेशा शास्त्रसम्मत ही बात करता हुँ।

मेरे कहने का मतलब है की मेरे विचार, शास्त्रों, इतिहास, भूगोल, विज्ञान और लोगों से प्रेरित तो होते हैं लेकिन इन सबसे प्रेरित होते हुए भी वें पृथक होते हैं।

आप मंत्र के अर्थ के नीचे देवी माँ को की गई मेरी प्रार्थना को पढ़कर मेरे विचारों को समझ सकते हैं जिसमें मैंने देवी से अपने लिए कुछ भी ना माँगकर भी बहुत कुछ माँग लिया है।

!! जय माता दी !!


Writer :- Vikas Bounthiyal 
Edited by :- NA
Source of article :- Self study on the basis of books and social sites.
Source of images :- Google non-copyrighted images and personel photo
Length of the article :- 466 Words (Calculated 





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