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Saturday, August 3, 2019

!! जय मैं, जय आप, जय हम !!

बहुतों को मेरी बात हजम नहीं होगी इसलिए वें मुझे गरियाने के लिए स्वतंत्र है। हम जो सोचते हैं वो हम नहीं सोच रहे बल्की हमे वो सोचने के लिए विवश किया जा रहा है। मतलब आज की तारीख में “जय जवान और जय किसान” से बडा कोई झूठ नहीं है।

यदि सड़क पर कोई रिक्शावाला या कोई Office मे काम करने वाला बडा साहब किसी Accident में मर जाये तो क्या सरकार, अक्षय कुमार या Paytm वाले उनके या उनके परिवार के लिए पैसे इकट्ठा करेंगे...? क्यों क्या वो Tax भरकर देश की रक्षा में लगनेवाले हथियार या गोला-बारूद का पैसा नहीं जुकाते...? क्या सैनिकों की तरह आप और मैं भी पाकिस्तान और चायना जैसे दुश्मन देशों से अपने देश की रक्षा में भागीदारी नहीं करते...?

यदि साधारण आदमी के मरने के बाद उनको कोई मदद नहीं मिलती तो सेना को क्यों पैसे बाँटे जाते हैं...? क्या हमारे बीवी-बच्चे नहीं...? क्या हम देशभक्त नही...? यदि Cafe Coffee Day के मालिक V. G Sidhartha जैसा कोई व्यापारि Business के लिए बैंक से कर्ज लेता हैं और उसका Business loss कर जाता है तो क्या वो व्यापारी सरकार पर कर्जमाफी का दबाव बनाता है....? क्या वो व्यापारी आत्महत्या की धमकी देता है...?

यदि एक व्यापारी या एक नौकरी करने वाले  भारतिय का कर्ज माफ नही होता तो खेतों में जहरीला अनाज, सब्जी और फल उगाकर देश को बेचनेवाले मुफ्तखोर, हरामी, देशद्रोही, गद्दार और पापी किसान का कर्जा माफ क्यों हो जाता है....?

Tax भरने के बदले देश की संपत्ती को लुटनेवाले जवान और खेत में हानिकारक रसायनिक खाद इस्तेमाल करके गरीब लोगों को कैंसर जैसे सैकड़ों हानिकारक बिमारी की चपेट में ढकेलने वाले किसान महान नही है।
बल्की महान और देशभक्त तो वें हैं जो अपनी मेहनत से Tax भरकर सैनिको की पगार जुटाते हैं और मुफ्तखोर किसानों का कर्जा अपने Tax के पैसों से माफ करवाते हैं। हम और आप जैसे श्रमिक सच्चे देशभक्त है ना की देश की रक्षा में कमजोर सेना या अनाज की जगह जहर ऊगाकर खिलाने वाला किसान।


देश का सच्चा सेवक तो मैं और आप जैसे १००% नौकरी पेशा, व्यापारी, Self Employed और श्रमिक वर्ग है ना की देश के लगभग ८०% दुष्ट किसान...."तो जय किसान किस बात का....?"


!! जय मैं, जय आप, जय हम !!

                                       
इसलिए हमेशा कहता हुँ की वो मत देखो जो तुमको दिखाया जा रहा है बल्की वो देखो जो तुमसे छुपाया जा रहा  है। देश की सेना यदि इतनी ही सक्षम होती तो आज कश्मीर में पिट ना रही होती। इतिहास गवाह है की जब-जब  देश की रक्षा की बात आयी तो सेना ने अपने राजा का भी विद्रोह किया है तो बँधे हाथवाले सैनिकों की देशभक्ती  पर एक प्रश्नच्न्ह (?) जरूर लगता है। इसलिए सेना के हाथ बँधे हुए है ऐसा कहना एक चुतियापा ही होगा।

मैंने कई विडियों देखे है जिसमें जेहादियों के झुँड में फँसे अपने अकेले सैनिक मित्र को छोड़कर बाकी के सैनिक भाग जाते हैं और जेहादी उस सैनिक को बडी बेरहमी से मार डालते हैं। जिसके बाद शुरू होता है सैनिक के हाथ बँधे होने का चुतियापा। अरे हरामियों तुम्हारे भाई को जेहादी कुत्ता बनाकर मार रहे हैं और तुमको Shoot Orders का इंतजार रहता है और देश की बेवकुफ जनता उस मरे हुए सैनिक के Account में करोड़ो रूपये Paytm, PhonePe कर डालती है जो उसके परिवार वालों को कभी मिलता है या नहीं ये तो भगवान ही जाने पर मुझे तो नहीं लगता की वो पैसा सैनिकों को मिलता है।

बलिदानी सैनिको को सरकार PF, Gratuity और पेंशन के रूप में लाखो रूपये देती है और परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी देती है जिससे सैनिकों के मरने और उसके बदले परिवार के एक सदस्य को नौकरी मिलने का क्रम निरंतर चलता ही रहता है तो तुम उनके Account में पैसे डालकर काहे अपना सौ-पचास खराब करते हों....? सैनिकों  को पैसे देने के बदले हम अपने आस-पास के जरुरतमंदो या घाटे में चल रहे V. G Sidhartha जैसे किसी सभ्य व्यापारी  के लिए Charity करके घाटे में चल रही भारत की कंपनियों को सहारा देकर अपना कर्त्तव्य निभा सकते है। हम लोगो को V. G Sidhartha जैसे करतायनिष्ट व्यापारियों को सहारा नहीं देना चाहिए....?

इसलिए जय जवान, जय किसान के बदले जय रिक्शावाला, जय ठेलेवाला, जय शिक्षक, जय Salon वाला, जय मोची, जय किराना वाला, जय धोबी, जय सब्जीवाला, जय चाय-दूध-पेपर वाला, जय वॉचमैन, जय फेरीवाला, जय Salesperson , जय Office Executive, जय Driver, जय  V. G Sidhartha, जय मैं, जय आप, जय हम !!


Writer :- Vikas Bounthiyal 
Edited by :- NA
Source of article :-  This is my view on the basis of self study because I was part of CCD between April-17 to Jun-18
Source of images :- Google non-copyrighted images
Length of the article :- 784 Words (Calculated by wordcounter.net)

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