Cricket World Cup 2019 - News Beyond The Media House

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Tuesday, July 9, 2019

Cricket World Cup 2019

Cricket World Cup का Season चल रहा है और लगभग २०-२५ दिनों से मैने कोई Status नही डाला तो सोचा क्युँ ना आज बता दुँ की World Cup कौन जीतने वाला है। चौकियेगा नहीं ये बात मुझे मुँबई के कुछ सट्टेबाज मित्रों से पता चली है।

अब सट्टोरियों की यह भविष्यवाणी कितनी सच साबित होती है ये तो वक्त ही बतायेगा लेकिन मैं यह बात ५-६ सट्टोरियों से Confirm करने के बाद ही कह रहा हुँ।

लेकिन जीतने वाली टिम का नाम मैं अभी यहाँ पहले ही Status पर नहीं बताऊँगा क्योंकी मेरा पहला Status पढ़ने वाले लोगों की गिनती लगभग 500+ तक होती है तो Last Status तक आते-आते केवल 100-150 लोग ही रह जाते हैं। इसलिए अब से कोशिश करुँगा की मुद्दे की बात केवल अंतिम Status पर ही करुँ।

चलो तो आज इस बेवकुफों के खेल क्रिकेट पर ही बात की जाएँ।

अब कुछ लोग सोचेंगे की मैं भी क्या आदमी हुँ कि, “हर वो चीज जिनसे आप लोग प्यार करते हैं, जिनके आप दिवाने होते हैं या जिनसे आप लोगो को बहुत लगाव होता है उसे ही क्यों मैं हमेशा Target करता हुँ।”

क्या करूँ साहब और मेमसाहब....🤷‍♂️ धर्म, देशप्रेम, मनोरंजन, अच्छे काम और बुरे काम को लेकर मेरा अपना एक अलग ही नजरिया है और जो भी मेरे साथ रहता है या मेरे पचास-साठ Facebook Post, Blogs, Articles या WhatsApp Status गलती से ही सही लेकिन पढ़ लेता है तो ये मैं गैरेंटी देकर कह सकता हुँ की उसका Brainwash जरूर हो जाता है। खैर बहुत हुई पटेली अब मुद्दे पर आते हैं।

देशद्रोही खेल क्रिकेट पर बात करने से पहले मैं बात करना चाहुँगा उस व्यक्ती की जिनकी वजह से क्रिकेट को लेकर वर्तमान के मेरे विचार बने हैं। वो व्यक्ती है “स्वर्गीय राजीव भाई दिक्षित जी।” उनका नाम तो राजीव दिक्षित था लेकिन लोगो के बीच वें “राजीव भाई” के नाम से जाने जाते थे। मैं उन्हें काफी पहले से ही “राजीव भाई दिक्षित” ही कहना पसंद करता था क्योंकी उनके नाम और उपनाम के बीच का भाई शब्द मुझे बहुत ही जँचता था। यहाँ ये बात इसलिए कह रहा हुँ ताकी लोग ये ना समझे की मैं कोई गूगलिया बकलौली या किसी Article से पढ़कर यह सब ज्ञान पेल रहा हुँ। गूगल और सभी नये-नये लेखक तो कल के आये हैं लेकिन मेरे विचार राजीव भाई दिक्षित जी से काफी पहले से ही मिलते थे। मैं पहले से ही कहता आया हुँ कि गुगल, लेखक, समाचार पत्र, कोई Foreign Research या इतिहासकारों पर मुझे रंचमात्र भी भरोसा नहीं। मैं खुद की Research करता हुँ और उसी बात को मानता भी हुँ। खैर मैं तो विद्यालय के दिनों से ही राजीव भाई दिक्षित जी से प्रभावित था और उन दिनों मालूम-बाबा याने की गुगल का नामो-निशान कम से कम भारत में तो था ही नहीं।

राजीव भाई दिक्षित, आसाराम बापू और रामदेव बाबा की तिकड़ी मुझे पहले से ही अभेद व विश्व-विजयी लगती थी। हाँ वो बात अलग है की बाद में इन तीनों में कुछ वैचारिक मतभेद हुए और ये पृथक होकर कार्य करने लगे।

इन तीनों के विचारों से मिलकर ही मेरे एक अलग विचार बने और एक संकुचित मानसिकता से परे देखने की जो क्षमता मुझे प्राप्त है उसमे इन तीनों व्यक्तियों का भी कहीं ना कहीं योगदान है विशेषकर राजीव भाई दिक्षित जी का तो सबसे अधिक योगदान है।

अब लोग आसाराम को बलात्कारी कहेंगे तो उस बारे में मैं फिर कभी लिखुँगा क्योंकी आज का विषय देशद्रोही और बेवकुफों के खेल क्रिकेट का है। इसलिए मैं मुद्दों से भटकना नहीं चाहता।

पहले क्रिकेट की इसी कड़ी मे मैं आपसे एक सवाल पुँछना चाहता हुँ....👇

“क्या आप पिछली सदी या इस सदी के कुछ महान व्यक्तियों के नाम बता सकते हैं....?”

शायद आप लोग कुछ नाम लेंगे जैसे की, “गाँधी, नेहरू, The Copy Paster मतलब आँबेडकर, अटल बिहारी वाजपेयी, बालासाहेब ठाकरे, अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, सचिन तेंदुलकर, बिसमिल्लाह खाँ, अशफ़ाक़ उल्लाह खान, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, अब्दुल ग़फूर, नर्कवासी भूतपूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम, १९६५ भारत-पाक युग्ध का गद्दार सैनिक अब्दुल हामिद आदि।

यदि आपके अनुसार मुझसे कोई नाम रह गया हो तो मुझे WhatsApp करके जरूर बताना।

हाँ एक बात और कहना चाहुँगा की नर्कवासी भूतपूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम और १९६५ के भारत-पाक युद्ध के गद्दार भारतिय सैनिक अब्दुल हामिद और अन्य मुसलमानों के बारे में आप जो कुछ भी जानते हो वो सब झूठ है लेकिन उस विषय पर फिर कभी एक-एक करके बारी-बारी से लिखुँगा। आज तो क्रिकेट का दिन है।

यदि मुझ से पुँछा जाएँ तो मेरे अनुसार सदी के महान व्यक्तियों की मेरी सूची (List) में अब तक तो प्रथम नाम स्वर्गिय राजीव दिक्षित जी का ही होगा जो की हमारे जीवनकाल में ही हमारे समकालिन सदी में रहे हैं।

जैसा की भारत में होता आया है की असली नायक को कोई नहीं जानता लेकिन भड़वे अब्दुल कलाम जैसे दो कौडी के कुरानी किडों को सभी देश का हिरो मानते हैं।

मुझे पता है की आप में से भी राजीव दिक्षित जी को केवल कुछ ही गिने-चुने लोग जानते होंगे। राजीव भाई दिक्षित जी के राजनीती से परें महान कार्यों से कुछ ही लोग अवगत होंगे। तो आज मैं राजीव भाई जी की तो नहीं लेकिन उनकी ९८% विचार जिनसे मैं हमेशा सहमत रहा हुँ उनमें से एक बात “क्रिकेट” की चर्चा करूँगा।

आज देखते हैं की मेरी Phone Book में क्रिकेट के कितने दिवाने है....?

पहले और Last Status तक आनेवालों  की गिनती का Difference कितना होता है....😉

वैसे तो मैं हमेशा से ही राजीव भाई दिक्षित जी के विचारों से पूरी तरह से सहमत रहा हुँ। लेकिन इसके साथ ही साथ मेरा यह भी मानना है की कोई भी व्यक्ती कितना भी महान क्यों ना हो लेकिन वो पूरी तरह से संपूर्ण नहीं हो सकता इसलिए मुझे राजीव भाई दिक्षित जी की ९८% बाते ही हजम होती है और उनके केवल दो विचारों से मैं कतई सहमत नहीं रहा हुँ और ना ही कभी भविष्य में सहमत रहुँगा।

मानता हुँ की ये बात इसी तरह है की मैं आसमान की तरफ मुँह करके ईश्वर के किसी काम के लिए उन पर पर थुँकने का प्रयास करुँ और वो मेरे चेहरे पर ही पड़े लेकिन फिर भी मैं राजीव भाई जी के दो विचारों का कड़ा विरोधी हुँ और आसमान जैसे विशाल व्यक्तित्व वाले स्वर्गिय राजीव भाई दिक्षित जी पर मैं अपने बौने कद के होने पर भी विरोध करता हुँ और उन दो बातों का आजीवन विरोध ही करता रहुँगा।

मेरी भी कई बाते गलत हो सकती है लेकिन मैं किसी राजनैतिक, प्रशासनिक, समाजसेवा या व्यवसायिक पद के उच्च सिंहासन पर विराजमान नहीं हुँ जिससे “अपनी गलती को झट से मान जाना, समय और बोध होने पर अपने विचारों को बदल देना ये मेरे व्यक्तित्व का परिचायक है।”

लेकिन मेरे कुछ विचार ऐसे है जिनके विरूद्ध स्वयं परमेश्वर भी धरती पर ऊतर कर मुझे उनके गलत होने का प्रमाण दे तब भी मैं उस बात को नहीं मानुँगा और सदैव ऐसे विचारों पर थुँकने का प्रयास करूँगा।

राजीव भाई दिक्षित जी के उन दो विचारों की भी बात मैं फिर कभी किसी और दिन करुँगा।

इस गुलामों वाले घटिया खेल क्रिकेट पर अपने विचार रखने से पहले मैं एक बार फिर से यह साफ कर देना चाहता हुँ की मेरे ये विचार स्वर्गिय राजीव भाई दिक्षित जी से प्रेरित और मेरी खुद की personal analysis पर based है। इसको मैंने किसी भी जगह पर ना ही सुना है और ना ही पढ़ा है। ये क्रिकेट को लेकर मेरे अपने विचार है तो हो सकता है की आपमें से कई लोग इससे सहमत ना हो लेकिन उससे मुझे कोई फर्क नही पड़ता क्योंकी दुनिया में राम, जिजस, अल्लाह और भी कई भूतनिके को माननेवाले लोग है और हर कोई अपना ही पिछवाडा लाल मानकर चलता है लेकिन सच तो एक ही होता है और वो सच ही होता है।

मैं तो राम का राम और अल्लाह का अल्लाह (Sorry it’s slip of tongue) मतलब दूध का दूध और पानी का पानी करने में विश्वास रखता हुँ।

वैसे तो मैं खुद स्कूल-कॉलेज के दिनों में क्रिकेट का Fan रहा हुँ। मैं खेलता तो कुछ खास नहीं था लेकिन मुँबई के कुछ टिमों में पेशेवर बल्लेबाज और विकेट-किपर के रूप में खेल चुका हुँ और एक Privet Club की टिम में लंबे समय तक उपकप्तान भी रह चुका हुँ और कुछ महत्वपूर्ण मैचों में कप्तानी करके टिम को Unexpected विजय भी दिलवा चुका हुँ। आप इसे मेरा Luck कहें या टिम में मेरी मस्तीभरी हरकतों की वजह से बनी Popularity लेकिन Cricket में मेरी Performance बहुत ही साधारण और Average होने के बावजूद भी लोग मुझे टिम के A-Grade Players की श्रेणी में ही रखते थे। Pressure कितना ही क्यों ना हो लेकिन टिम में मेरा होना लगभग तय ही होता था और मेरी Batting का Order भी Almost Fix ही रहता था। क्रिकेट को लेकर मेरे सपने तो बड़े नहीं थे लेकिन घर के बुरे आर्थिक दौर में यही एक Motivation और थोडी बहुत Earning और Timepass का सहारा था। उस समय क्रिकेट से जितना प्यार था आज उतनी ही नफरत है। कारण सिर्फ एक की क्रिकेट भारतियों के साथ एक बहुत बडा धोखा और गुलामी का प्रतिक है।

क्या आपने कभी सोचा है की अमेरिका, ब्राजिल, चीन, जापान, रूस, जर्मनी, फ्राँस, कनाडा, पुर्तगाल जैसे और भी कई देश है जो क्रिकेट नहीं खेलते ! इसका क्या कारण हो सकता है....?

वास्तव में ये सारे देश अंग्रेजों के इस खेल का बहिष्कार करते हैं क्योंकी वें क्रिकेट को एक ब्रिटिश खेल मानते हैं और क्रिकेट को खेलना गुलामी का प्रतिक मानते हैं। मतलब की वें सारे देश जो की एक साधन-संपन्न देश है वे इस गुलामों के खेल को खेलना अपमान मानते हैं। क्रिकेट केवल भारत जैसे ब्रिटेन के उपनिवेश रहे विकासशील बेवकुफ लोगों के देशों में ही प्रचलित एंव लोकप्रिय है। जबसे मुझे ये बात पता चली उसी दिन से मेरे मन में क्रिकेट के प्रति घृणा पैदा हो गई लेकिन फिर भी भारत जैसे अंग्रेजों के मानसिक गुलामोवाले देश में क्रिकेट का भूत हर आदमी के सर पर चढ़कर नाचता है इसलिए कई बार मेरा भी इस चुतियापे से ज्यादा दूर रहना मुश्किल हो जाता है।

हम भारतिय हो और गुलामों वाली हरकत ना करें तो ऐसा संभव ही नहीं हो सकता है। ये तो वहीं बात है की कोई कटुवा हो और जेहाद ना करें ! खैर कटुवों की पेलाई तो हर समय चलती ही रहेगी लेकिन आज कहीं ऐसा ना हो जाएँ की मैं अपने मुख्य विषय से भटक जाऊँ और कुरानी किड़ों पर किटनाशक छिड़कना शुरू कर दुँ।💦

ला-खोल-पिला-क्वॉटर्...Sorry again slip of tongue I mean to say ला-हौल-विली-कुँवत....🙏

हाँ तो मैं कह रहा था की भारतिय हुँ और गुलामों वाली हरकत ना करूँ तो ऐसा संभव होगा ही नहीं !

मतलब मेरा ना चाहते हुए भी किसी ना किसी रूप में क्रिकेट से आमना-सामना हो ही जाता है। लंबे समय से Hotel Industry से जुडा हुँ और कई कंपनियों में मैनेजर के रूप में काम कर चुका हुँ तो कई बार मेरे Field में Sales Targets भी क्रिकेट के मैंचों पर निर्भर होकर रह जाते हैं। खैर इन सब के बावजुद भी मैं खुद को क्रिकेट से दूर रखने में काफी हद तक सफल भी रहता हुँ। मुझे याद है की २००३ के बाद और क्रिकेट क्लब छोडने के बाद से मैंने क्रिकेट की पूरी Series सीधे २०१६ के IPL में देखी थी और वो भी वजह केवल एक ही थी की मैंने अपने M Com के Exams के लिए Job छोडी थी और Exams समाप्त होने के बाद नयी Job का दूर-दूर तक कोई ठिकाना नही था। इसलिए Time Pass करने के लिए मैने क्रिकेट की वो पूरी Series देख डाली थी।

उसके बाद आज लगभग तीन साल हो गये है की अब तक मैंने क्रिकेट की Series तो छोड़ो कभी किसी एक मैच के 5-6 Overs भी नहीं देखे। यदि मैंने देखे अपने last match की बात करें तो वो मैने पिछले महिने की २२ जून को हुए “भारत-अफगानिस्तान” के मैच के अंतिम के 2-3 Overs को गलती से देख लिया था।

गलती से मतलब लगभग सवा दस या साढ़े दस बज रहे होंगे तभी मैं घर के पास की एक चाय की दुकान से चाय पीकर घर जाने के लिए निकला। दुसरे दिन सुबह जल्दी ऊठकर काम करना था तो थोडा जल्दी में था। इतने में दुकान के बाहर अपने एक भाई मोबाईल पर लाईव मैच देख रहे थे और साथ मे Commentary भी कर रहे थे। उनकी Commentary सुनकर मुझे बड़ा मजा आने लगा🤣

जब मैं घर जाने के लिए निकल रहा था तब Commentator भाईसाहब ने मुझसे कहा की २-३ ओवर ही बचे हैं तो रूक जाओं इसलिए मैं उनका मन रखने के लिए उनके पास बैठ गया और सोचा की २-३ बॉल देखकर निकल जाता हुँ। इतने में मैंच ऐसे रोमांचक मोड पर आकर खडा हो गया की मुझे २-३ बॉल से पूरे एक ओवर तक रोके रखा और ऊपर से भाईसाहब की Commentary ने ऐसा मौसम बनाया की मुझे बाँध ही दिया।

लेकिन मेरे रूकने की सबसे मुख्य बात यह थी की “मैने कभी अफगानी कटुवों को Cricket Uniform में नहीं देखा था” तो मैं ये देखने के लिए थोडा Excited था की ये ऊँट का मूत पीने वाले भड़वे और पिछवाडा ऊठाकर नमाज पढने वाले अफगानी सुँअर बम बाँधकर फटने के अलावा क्रिकेट भी खेल लेते हैं....?😳मानो जैसे मुझे मेरे आँखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था। इसलिए मैं कौतुहलवश वो मैच देखने लगा।

मैं एक और वजह से मैच देख रहा था की Live Match में खिलाडी किस तरह से सट्टेबाजों के संपर्क में रहते हैं और किस तरह जीते हुए मैच को हारते या हारे हुए मैच को जीतते हैं....?

इस मैच में भी वही हुआ जिसे मैं देखना चाहता था। अफगानिस्तान बहुत अच्छा खेल रही थी और उसकी जीत तो लगभग तय ही थी। जेहादी बल्लेबाज मोहम्मद नबी काफी अच्छा खेल रहा था और उसे देखकर लग रहा था की वो बडी ही आसानी से अफगानिस्तान को जीत दिलवा देगा। लेकिन मुझे किसी की जीत या हार में कोई रूची नहीं थी। मेरी आँखे तो वो ढुँढ़ रही थी जो Normal Cricket Fans नहीं देख सकते और वो चीज थी सट्टा (Betting) या Match Fixing....🤝

मुझे पता है की मैच तो सट्टेबाजों के ईशारों पर ही चल रहा था और इस मैच का परिणाम भी लगभग तय ही था लेकिन कभी-कभी जीतने वाली टिम पर पैसों की बोली कम या ज्यादा हो जाती है और सट्टेबाजों का मुनाफे का गणित गड़बड़ा जाता है तो Live Match में Result को कैसे बदला जाता है तो उसी बात को इस मैच में भी मेरी नजरे ढुँढ रही थी। मोहम्मद नबी अपने अर्धशतक से कुछ ही दूर था और मोहम्मद नबी को रोक पाना भारत के किसी भी गेंदबाज के बस में नही था। तभी अचानक मुझे ऐसा लगा की शायद मोहम्मद नबी ने अफगानिस्तान की हार या जीत को सट्टेबाजों से Confirm करनी चाही और उसकी Body Language देखकर मुझे भी ऐसा लगा की वो कुछ Confirmation चाहता है। अब देखनेवाली बात यह थी की मोहम्मद नबी का Bat पूरी तरह से ठिक था और मैं ऐसा इसलिए कह रहा हुँ क्योंकी जब किसी बल्लेबाज के Bat में कोई भी Problem होती है तो ये बात हमें उसके Body Language और खेले जा रहे Shots से पता चल जाती है की उसे परेशानी हो रही है। लेकिन मोहम्मद नबी को देखकर ऐसा लग नहीं रहा था की उसके बल्ले में कोई समस्या थी या उसे Shots खेलने में कोई परेशानी थी।

मैने तो वो मैच एक ही बार देखा और हो सकता है की शायद मुझे कोई गलत-फहमी हुई हो लेकिन आप विडियों ध्यान से देखोगे तो आप भी इस बात पर संदेह तो करोगे ही।

जब मोहम्मद नबी ने नयी Bat मँगवाई तब दो आदमी बैट लेकर आये और जैसा की यह समय मैच का एकदम महत्वपूर्ण समय था जिसमें कोई नौसिखिया बल्लेबाज भी होता तो कम से कम दो-तीन Bats हाथ में पकड़कर जाँचता और उसमें से एक Bat को Select करता लेकिन मोहम्मद नबी ने ऐसा बिल्कुल भी नहीं किया और बड़ी ही आसानी से एक बल्ला चुन लिया मानों केवल औपचारिकता (Formality) पूरी कर रहा हो। मोहम्मद नबी ने केवल बल्ले बदलने की एक Formality पूरी की और इसी बीच मैच को किस ओर लेकर जाना है इसके लिए सट्टेबाजों की Confirmation भी ले ली। यह सब उसकी Body Language से साफ दिख रहा था और जहाँ तक मुझे याद है इस समय तक उसकी Half Century भी पूरी नहीं हुई थी।

मोहम्मद नबी ने जब अपना बल्ला बेहद नाटकिय तरीके से बदला तब बल्ला देने आये दो आदमी में से पहला आदमी कुछ ही सेकेंड में बल्ला देकर जाने लगा और दुसरे आदमी ने मोहम्मद नबी से कुछ कहा।

हाँ ये बात तो तय है की सीधे नही कहा होगा की हारना है लेकिन इन तीनों की Body Language इतनी Poor थी की कोई भी इनके Over Acting को भाँप सकता था।
मैं यहाँ फिर से एक बार कहता हुँ की शायद मैं गलत हो सकता हुँ लेकिन फिर भी मोहम्मद नबी का बल्ला बदलना बेहद ही नाटकिय था। मुझे ठिक से याद नही लेकिन इसके बाद ही शायद मोहम्मद नबी का अर्धशतक पूरा हुआ। इसमें एक दिलचस्प बात और हुई की कप्तान विराट कोहली के होते हुए भी धोनी ने पटेली में Keeping के पीछे से आकर Bowler को कुछ कहा और उसकी अगली ही गेंद पर मोहम्मद नबी बेहद ही नाटकिय तरीके से Long पर Catch Out हो गया।

अब जैसा की मैं पहले से ही कहता आया हुँ की धोनी की Wife साक्षी एक भोले-भाले से चेहरे के पीछे बेहद खतरनाक सट्टेबाज है। धोनी को धोनी बनाने के पीछे भी इसी शैतानी खोपड़ी का हाथ है।

मेरे कहने का मतलब ये हैं की मैच में  बल्लेबाज का बल्ला बदलना, धोनी का Bowler को Tip देना और उसके अगले ही गेंद पर Crease पर जमें एक बल्लेबाज का आसान सा Catch हवा में उछालना मानों धोनी को एक बेहद सुलझा हुआ और Technically मँझा हुआ क्रिकेटर और Advisor साबित करने का और भारत को जीताने का नाटकभर प्रतित हो रहा था।
इसके बाद गेंदबाज मोहम्मद समी द्वारा लगातार तीन विकेट लेकर Hatric लेना और भारत का एक हारते हुए मैच को ११ रनों से जीतना बेहद ही संदेहास्पद लग रहा था। खैर हो सकता है की जैसा मैं सोच रहा हुँ ऐसा ना हो लेकिन क्रिकेट में अक्सर ऐसा ही होता है।

मैने कई ऐसे मैच देखे हैं जिनमें साफ दिख रहा होता है की किस तरह से धोनी अंतिम के ओवरों में बल्लेबाजी करता है और तय शर्त के अनुसार मैच जीत से हार की ओर और हार से जीत की ओर लेकर जाता है।

पूर्व नियोजित मैंच और Spot Fixing में अफगानिस्तान का मोहम्मद नबी भले ही नया हो लेकिन भारतिय टिम विशेषकर Dhoni and Wife इस खेल के मँझे हुए खिलाड़ी है। मोहम्मद नबी को Spot Fixing के लिए अभी अपनी Body Language और Timing पर बहुत मेहनत करनी होगी तभी वो धोनी के Acting level के आसपास पहुँच पायेगा।

बस इन्हीं कुछ कारणों की वजह से मैं जल्दी से क्रिकेट नहीं देखता और क्रिकेट देखना, खेलना या किसी भी रूप में क्रिकेट में Participate करने को एक देशद्रोह मानता हुँ।

अब कुछ लोग बोलेंगे की Match Fixing का देशद्रोह से क्या लेना देना....?

जी बिल्कुल भी लेना-देना नहीं....उसका और भी कई कारण है।

क्रिकेट देखना एक गुलाम मानसिकता का प्रतिक है। ब्रिटिशों का धर्म, ब्रिटिशों की भाषा, उनका खेल, उनका पहनावा और खानपान, अंग्रेजों की lifestyle सब कुछ एक गुलामों की मानसिकता का प्रतिक है। हाँ यदि कोई Option ना हो तो बात अलग है लेकिन भारत जैसे समृद्ध ज्ञान के अगाध सागर में धर्म से लेकर संस्कृति तक, खेल से लेकर मनोरंजन तक, पहनावे से लेकर खान-पान तक सभी मायनों में कोई Option ना मिले ऐसा तो हो ही नहीं सकता।

अंग्रेजों की सभ्यता मात्र साढ़े तीन से चार हजार साल पुरानी होगी लेकिन हमारी सभ्यता यदि प्रमाणों के साथ कहे तो साढें सोलह लाख साल से भी प्राचीन है और यदि आध्यात्मिकता की बात करें तो हमारी सभ्यता करोड़ो-अरबो-खरबो साल पहले पूरे ब्रहमांड के बनने से भी पहले की है। इसलिए कल के बने अंग्रेजी, क्रिकेट और Western Culture से बेहतर है की हम भारतिय धरती पर बने खेल और संस्कृति से जुडे।

इन सब के अलावा इंगलैंड के ICC Cricket Board को भारतिय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) से इतनी Income हो जाती है जिसका सामान्य लोग अंदाजा तक नहीं लगा सकते। पूरी दुनिया में शायद ही BCCI जितनी Financially Strong कोई अन्य संस्था होगी। खुद ICC भी BCCI के सामने चाय कम पानी है।

स्वतंत्रता के बाद भारत की अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण करने एंव भारत को खुफिया तरिको से लुटने के लिए इंग्लैंड ने ये कई नायाब तरीकों को निकाला है। क्रिकेट भी एक ऐसा माध्यम है जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को लुटा जा रहा है। खेल अंग्रेजों का और परेशानी गुलामों को बस यही हाल हमारा है।

क्रिकेट के महत्वपूर्ण मैंच अधिकतर Exams के समय या फिर छुट्टीयों के समय में ही होते हैं। इसका सीधा कारण यह है की भारत के युवा Exams से भटके और आनेवाले १०-१२ सालों में इसका नुकसान देश को हो। छुट्टियों में जहाँ लोग को अपना समय Self Study, Self Talk, Self Improvement, परिवार के सदस्यों से मेल-जोल आदि महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना चाहिए लेकिन मैच के कारण अक्सर लोग सब-कुछ टाल जाते हैं। और भी बहुत सारी बाते हैं क्रिकेट को देशद्रोह साबित करने के लिए।

क्रिकेट वैसा ही लूट का षडयंत्र है जैसा की देश में चल रहे “हरे रामा हरे कृष्णा ट्रेस्ट” (ISKON), Hindustan Unilever जैसी विदेशी कंपनियाँ या फिर Medicence Farma कंपनियाँ, Catholics Missionaries, News Channels and Media House, ओम शाँति ट्रस्ट, Bollywood, Liberal and Leftist Lobby, WHO, Human Rights Trust, Animal Right वाले, CRY Foundation, RSS, BJP, भारत के सभी मंदिर-मस्जिद आदि सभी नाम भारत को लूटकर भारत के पैसे हपचने वाले या भारत के पैसों को हमारी जेबों से निकलवाकर विदेशों में भेजनेवाले नाम है। हमें पूरी तरह से तो नहीं लेकिन जितना भी हो सके उतना इन सभी का बहिष्कार करना चाहिए।

चलो अब बात करता हुँ की World Cup कौन जीतने जा रहा है....?

मेरी जानकारी में इस बार फाईनल में भारत और इंग्लैंड जा रही है और World Cup इंग्लैंड ही जीतने वाली है।

मेरे सट्टेबाज मित्रों ने इंग्लैंड के जीत के कई कारण दिए जिसमें से एक कारण में मुझे Logic नजर आया। Logic यह है की दुनियाभर के क्रिकेट प्रेमियों में भारत और इंग्लैंड की टिम में भारत की टिम ज्यादा Popular है तो यदि भारत और इंग्लैंड फाईनल में पहुँच जाते हैं तो भारतिय Popularity के कारण फाईनल मैच में दुनिया भर के लोग भारतिय टिम पर सबसे ज्यादा बोली लगायेंगे। मतलब भारत पर सबसे ज्यादा सट्टा लगेगा और इतना ज्यादा पैसा लगा होने पर सट्टेबाज चाहेंगे की भारत हारे और भारत पर लगे इतने बडे पैसों को सट्टेबाज बडे ताव से हपच डाले। मतलब सब कुछ सट्टेबाजों के अनुसार हुआ तो अधिक संभावना यही है की इस बार का World Cup इंग्लैंड ही लेकर जायेगी ! बाकी देखते हैं की भविष्य के गर्त में से क्या परिणाम निकलकर आता है....?

अब मैने कह दिया तो कोई इंग्लैंड़ पर बडा पैसा लगाकर मत बैठ जाना।

किसी के सट्टा हारने या जीतने की जिम्मेदारी मेरी नहीं होगी।

इसी के साथ आप सभी को मैं यह भी बताना चाहुँगा की मेरी Blogging Website पर पचास हजार Visitors पूरे हो गये हैं।😀

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