अंतराष्ट्रीय मजदूर दिवस ! - News Beyond The Media House

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Wednesday, May 1, 2019

अंतराष्ट्रीय मजदूर दिवस !

बहुतों को इस लेख की बात हजम नहीं होगी इसलिए वें मुझे गरियाने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है।

हम जो सोचते हैं वो हम नहीं सोच रहे बल्की हमे वो सोचने के लिए विवश किया जा रहा होता है इसलिए मैं हमेशा कहता हुँ की वो मत देखो जो तुमको दिखाया जा रहा है बल्की वो देखो जो तुमसे छुपाया जा रहा है।

यदि सड़क पर कोई रिक्शा वाला या कोई Office मे काम करनेवाला बडा साहब किसी Accident में मर जाये तो क्या सरकार, अक्षय कुमार या Paytm वाले उसके और उसके परिवार के लिए पैसे इकट्ठा करेंगे...?

क्यों क्या वो  रिक्शा वाला Tax भरकर देश की सुरक्षा में लगने वाले "हथियार या गोला-बारूद" का पैसा नहीं चुकाते...? क्या आप और मैं पाकिस्तान-चायना जैसे दुश्मन देशों से अपने देश की रक्षा नहीं करते...?

यदि साधारण आदमी के मरने के बाद उनको कोई मदद नहीं मिलती तो सेना को क्यों पैसे बाँटे जाते हैं...? क्या हमारे बीवी-बच्चे नहीं...? क्या हम देशभक्त नही...? क्या हमारे Tax के पैसों पर देश का विकास और देश की सुरक्षा निर्भर नहीं....?










यदि कोई व्यापारि Business के लिए बैंक से कर्ज लेता हैं और उसका Business loss कर जाता है तो क्या वो व्यापारी सरकार पर कर्जमाफी का दबाव बनाता है....? क्या वो व्यापारी आत्महत्या की धमकी देता है...? नहीं ना तब किसानों को ही दया के पात्र की श्रेणी में क्यूँ रखा जाता है....?

यदि एक व्यापारी या एक नौकरी करनेवाले का कर्ज माफ नही होता तो देश को जहरीला अनाज, सब्जी और फल बेचनेवाले मुफ्तखोर, हरामी, देशद्रोही, गद्दार और पापी किसान का कर्जा माफ क्यों हो जाता है....?

Tax भरने के बदले Tax में छूट लेकर देश की संपत्ती को लुटनेवाले जवान और खेत में हानिकारक रसायनिक खाद इस्तेमाल करके गरीब लोगों को कैंसर जैसे सैकड़ों हानिकारक बिमारीयों की चपेट में ढकेलने वाले किसान महान नही है। सही मायनो में देश की जनता जो मेहनत करके Tax भारती है वही महान है।
 

मतलब आज की तारीख में “जय जवान और जय किसान” से बडा कोई झूठ नहीं है।

महान और देशभक्त तो वें हैं जो अपनी मेहनत से Tax भरकर सैनिको की पगार जुटाते हैं और भड़वे मुफ्तखोर किसानों का कर्जा अपने Tax के पैसों से माफ करवाते हैं। हम और आप जैसे श्रमिक सच्चे देशभक्त है ना की देश की रक्षा में कमजोर सेना या अनाज की जगह जहर ऊगाकर खिलानेवाले किसान।

देश का सच्चा सेवक तो मैं और आप जैसे १००% नौकरीपेशा, व्यापारी, Self Employed और श्रमिक वर्ग है ना की देश के लगभग ८०% परजीवी सैनिक और किसान....तो जय जवान, जय किसान किस बात का....?

देश की सेना यदि इतनी ही सक्षम होती तो आज कश्मीर में पिट ना रही होती।

इतिहास गवाह है की जब-जब देश की रक्षा की बात आयी तो सेना ने अपने राजा तक का विद्रोहकर दिया है तो कश्मीरी पथरबाजों पर कार्यवाही करने के नाम पर बँधे हाथवाले सैनिकों की देशभक्ती पर एक प्रश्नचिन्ह (?) जरूर लगता है। इसलिए सेना के हाथ बँधे हुए है ऐसा कहना एक चुतियापा ही होगा।

मैंने कई विडियों देखे है जिसमें जेहादियों के झुँड में फँसे अपने अकेले सैनिक मित्र को छोड़कर बाकी के सैनिक भाग जाते हैं और जेहादी उस सैनिक को बडी बेरहमी से मार डालते हैं। जिसके बाद शुरू होता है सैनिक के हाथ बँधे होने का चुतियापा।

अरे हरामियों तुम्हारे भाई को जेहादी कुत्ता बनाकर मार रहे हैं और तुमको Shoot Orders का इंतजार रहता है और देश की बेवकुफ जनता उस मरे हुए सैनिक के Account में करोड़ो रूपये Paytm, PhonePe कर डालती है जो उसके परिवार वालों को कभी मिलता ही नहीं है।

बलिदानी सैनिको को सरकार PF, Gratuity, पेंशन के रूप में लाखो रूपये देती है और परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी देती है जिससे मरने, नौकरी पाने और पुनः मरने और पुनः नौकरी पाने का Cycle continue चलता ही रहता है, तो मुझे यह पता नहीं चलता की तुम उनके Account में पैसे डालकर काहे अपना सौ-पचास खराब करते हों....?

इसलिए मेरी मानो तो "जय जवान और जय किसान" के बदले जय रिक्शावाला, जय ठेलेवाला, जय शिक्षक, जय Salon वाला, जय मोची, जय किराना वाला, जय धोबी, जय सब्जीवाला, जय चाय-दूध-पेपर वाला, जय वॉचमैन, जय फेरीवाला, जय Salesperson , जय Office Executive, जय Driver कहना चाहिए।


!! जय मैं, जय आप, जय हम !!

Writer :- Vikas Bounthiyal
Edited by :- NA
Source of article :- Real life experience 
Source of images :- Google non-copyrighted images
Length of the article :- 739 Words (Calculated by wordcounter.net)



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