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Friday, February 1, 2019

#World No Hijab Day

1'St Feb-2013 was World Hijab Day but 1'St Feb-2019 is the World No Hijab Day.

 #No Hijab Day

          #No Hijab Day को समझने से पहले हिजाब क्या है उसे समझना जरुरी होगा। मुस्लिम महिलाओं द्वारा सिर के चारों तरफ लेपेटे जानेवाले कपड़े, चुनरी या दुपट्टे या फिर किसी भी तरह का कपड़ा जिससे महिलाये अपने सर एंव बालों को ढँके उसे हिजाब कहते हैं। हिजाब पहनने के वैसे तो कई सारे कारण हैं जैसे की धूप से बचाव, धूल-मिट्टी प्रदूषण से बालों की रक्षा, पर्दा करना इत्यादि इत्यादि किंतु मुस्लिमों में इसका एकमात्र कारण रूढ़िवादी धार्मिक आस्था है।  वास्तव में ईस्लाम में हिजाब को महिलाओं पर जबरन थोंपे जाने की दृष्टी से ही देखा जाता है। ईस्लाम में महिलाओं का हिजाब पहनना अनिवार्य है और खासकर तब जब वें घर से बाहर गैरमर्दों के बीच में हो।


No Hijab Day क्या है ?

         १ फरवरी २०१३ को नजमा खान ने World Hijab Day की शुरूवात की थी जिसमे एक निर्धारित स्थान पर एक समारोह का आयोजन किया गया और हर उम्र की गैरमुस्लिम स्त्रियों को ईस्लामी संस्कृती के प्रतिक हिजाब को पहनने का न्योता दिया गया। इस समारोह को शुरू करने का उद्देशेय लोगों के मन में घर कर गई ईस्लामिक कट्टरता की मानसिकता को झूठा ठहराकर हिजाब पहनने से जुडी खूबियों को लोगों के बीच मे रखना था। इसके साथ साथ नजमा खान का मकसद World Hijab Day के माध्यम से लोगों को हिजाब पहनने के पीछे के सकारात्मक कारणों के बारे में बताना भी था। इस समारोह के माध्यम से नजमा खान ने World Hijab Day की आड़ मे ईस्लाम की पुरूषवादी कट्टर मानसिकता द्वारा मुस्लिम-स्त्रियों के शोषण की रूढीवादी परंपराओं पर हिजाब डालने की कोशिश की जिसमे नजमा काफी हद तक कामयाब भी रहीं किन्तु जितनी संख्या में उन्होंने World Hijab Day Campaign के समर्थन के लिए भीड़ इकट्ठा की थी उससे कई-कई गुना अधिक आवाजे पूरी दुनिया भर से हिजाब के विरोध मे उठने लगीं, जिसका ये नतीजा हुआ की #World Hijab Day Campaign के उलट लोगों ने #No Hijab Day Campaign शुरू कर दिया।

#No Hijab Day Campaign

          #No Hijab Day की शुरूवात सर्वप्रथम दुनिया भर के अलग-अलग हिस्सों की मुस्लिम महिलाओं द्वारा ही की गयी। सोशल साईटों पर हिजाब निकालकर किसी डंडे के सहारे लटकाकर लहराने फिर उसे फेंकने के मुस्लिम महिलाओं के कई व्यक्तिगत विडियों वायरल हुए और उसके बाद कई ऐसे विडियों की भरमार आ गयी जिसमे महिलाओं ने हिजाब निकालकर उसे आग में जलाया। इस तरह मुस्लिम कट्टरपंधी और महिलाओं का शोषण करनेवाली हिजाबदारी रूढ़िवादी परंपरा के विरुद्ध #No Hijab Day Campaign शुरू हो गया। एक ओर जहाँ कुछ कट्टरपंथि मुल्लेकट्टरपंथि मुस्लिम महिलाएँ हिजाब पहनने के समर्थन में थी जिनमे कई पढे लिखे लोग भी शामिल थे वहीं दुसरी ओर उससे भी अधिक काफी बडी संख्या में गैरमुस्लिम मुस्लिम महिलाओं समेत पूरी दुनिया से डॉक्टर, इंजिनियर्स, वकील, व्यापार, फिल्मी सितारे, खेल व पत्रकारिता से जुडे लोगों का मानना था की हिजाब एक तरह से मुस्लिम महिलाओं पर अत्याचार व शोषण का प्रतिक है जिसे २१ वीं सदी में निकालकर फेंकना नितांत आवश्यक है।

          हिजाब पहनने को लेकर लोगों का अलग-अलग नजरिया हो सकता है किंतु इसे सही ठहरानेवालों की संख्या इसके विरोध में लोगों की संख्या के सम्मुख नगण्य है। हिजाब को पहनने के पीछे ३-४ तर्क है जैसे की प्रदूषण से रक्षा लेकिन यदि वाकई में ये कोई तर्क होता तो पुरूषों को भी हिजाब पहनना चाहिए। यदि कोई ये तर्क दें की हिजाब पहनने से धूप से रक्षा होती है तो फिर धूप से रक्षा के लिए टोपी भी तो पहनी जा सकती है ? यदि कोई हिजाब पहनने को एक धार्मिक कारण बतायें तब ऐसे धार्मिक परंपर का क्या लाभ जो २१वीं सदी में भी एक स्त्री को पुरूष के समान "समानता का अधिकार" ना दे सकें ? अब आखरी तर्क की बात करते हैं की हिजाब गैरमर्दों की वहसी व हवस भरी नजरों से महिलाओं की रक्षा करता है, तब तो भैय्या ये सवाल लाज़मी है कि , "अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस, जर्मनी, ब्रिटेन, आस्ट्रिया जैसे पश्चिमी देश और चयना, बर्मा, नेपाल जैसे एशियाई देश जहाँ हिजाब नहीं के बराबर पहना जाता है ,वहाँ की स्त्रियों के साथ शत्-प्रतिशत बलात्कार होता होगा और पाकिस्तान, बाँग्लादेश, ईरान, ईराक, सीरिया जैसे कट्टर ईस्लामिक देशों में महीलाओं पर होनेवाले बलात्कार जैसे अपराधों की संख्या शून्य ही होते होंगे ?" कहने का तात्पर्य ये है कि, "यदि स्त्रियों को यौन अत्याचारों के अपराधियों से बचाना है तो देश की कानून व्यवस्था ,पुलिस बल और विद्यालय मे नैतिक शिक्षा पर जोर देना होगा ना की स्त्रियों पर जबरन हिजाब पहनाने पर।" इस बात से ये स्पष्ट होता है की हिजाब पहनने से कोई धार्मिक, सामाजिक या व्यक्तिगत फायदा तो नहीं होता बल्की लोगों के मन में खुद को कट्टरपंथी विचारधारा का व्यक्ती पेश कर समाज से स्वयं को पृथक करने का नुकसान ही होता है।




















हिजाब के विरोध मे जो लोग सामने आये और उन्होंने जो तर्क रखें वे पूर्णत: सैधाँतिक है। हर Field से जुडे लोगों ने हिजाब ना पहनने को लेकर अपने पेशे से व व्यक्तिगत जीवन से जुडे अपने-अपने तर्क रखें जो हिजाब को ना पहनने के पीछे की वजहों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। आईये देखते हैं ऐसे ही कुछ Professionals और आम लोगों के तर्क :-




हिजाब पहनने पर डाँक्टरों की राय :- हिजाब को लगातार एंव लंबे समय तक पहनने से मस्तिष्क तक खून के सूचारू रूप से प्रवाह होने मे अवरोध उत्पन्न होता है जिससे भविष्य मे तनाव, अनिद्रा, डिप्रेशन, बालों के विकास में रूकावट, बालों का असमय सफेद होना, बालों का झडना व सिर में दर्द की शिकायत जैसे रोग हो सकते हैं। इसके अलावा हिजाब, नकाब और बुरखा लंबे समय तक पहनने से सुर्य की जीवनदायिनी किरणों से मिलनेवाले विटामिन डी नहीं मिल पाता जिससे शरीर में विटामिन डी की कमी से ३५ की उम्र पार करनेवाली स्त्रियों में हड्डीयों की कमजोरी की वजह से कमर, घुटनों आदि मे दर्द की शिकायत हो सकती है। गर्मी के दिनों में लगातार हिजाब पहनने से सर ताथा बालों को खुली हवा नहीं मिल पाती जिससे सिरदर्द के साथ साथ बालों मे पसीने के कारण हुए नमी की वजह से रूसी (Dandruff) होकर बाल झडने की समस्या उत्पन्न हो सकती है। Medical Terms के नजरिये से हिजाब को लगातार पहनने से लाभ की तुलना मे हानी कई गुना अधिक है इसलिए कई डॉक्टर हिजाब ना पहनने की सलाह देते हैं, लेकीन इसके साथ ही उनका ये भी कहना है की यदि धार्मिक मान्यता की वजह से हिजाब ना पहनना संभव ना हो और हिजाब पहनना आपके लिए एक मजबूरी हो तो केवल जरूरी मौकों पर ही ढिली एंव हवादार हिजाब ही पहने और जब भी संभव हो सके तब हिजाब निकाल दें।
हिजाब को लेकर कामकाजी मुस्लिम महिलाओं के अनुभव :- हिजाब पहनने से हम स्वयं को समाज से कटा हुआ और पृथक महसूस करते हैं। लोग हमारे बारे में एक अलग एंव संकीर्ण मानसिकता बना लेते हैं जिससे वे हमसे मेलजोल बढाने मे या अन्य कामकाज से संबंधी Deals करने में हिचकिचाते हैं और जिससे हमारा व्यक्तीगत जीवन व पेशा दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है। हिजाब पहनने से हम Uncomfortable Feel करते हैं जिससे हिजाब पहनना बेहद ही गैरजरूरी प्रथा लगती है।



 
मुस्लिम छात्राओं के हिजाब से जुड़े अनुभव :- स्कूल मे हिजाब पहनने से सहपाठी हमारा मजाक उडाते हैं जिससे हमारे आत्मविश्वास मे गिरावट आती है और इसका असर सीधे तौर पर हमारी शिक्षा पर पडता है। कट्टरपंथी पृष्ठभूमी से होने के कारण स्कूल और कॉलेज में निर्धारित ड्रेस कोड के एंवज मे हिजाब पहनने पर कई बार स्कूल और कॉलेज प्रसासन द्वारा अपमानित भी होना पडता है। किंतु एक कट्टरपंथी मानसिकतावाले मुस्लिम परिवार के सदस्य इसपर Compromise ना करके Trusty वालों से ही झगड़ पडते हैं, जिससे हमें या तो स्कूल-कॉलेज छोडकर अन्यत्र दाखिला लेना पडता है या फिर यदि Trust वाले हिजाब पहनने की हमारी शर्त को मान भी ले तो उस परिस्थिती में भी हमारी पूरे शिक्षा प्रसासन से दुश्मनी हो जाती है जो आगे चलकर रोजमर्रा के विद्यालय जीवन पर असर डालकर हमारी शिक्षा को प्रभावित करती है। हिजाब पहनने की वजह से अपने सहेलियों में हमारी Identity अन्य छात्राओं से बिलकुल अलग सी बनकर रह जाती है जिससे लोग हमें दोस्त नहीं बनाते और यदि दोस्त बनाया भी तो उनका व्यवहार हमारे प्रति असामान्य ही रहता है। गर्मियों में हिजाब काफी परेशान करता है और बारिश में तो हिजाब के भिग जाने पर सर्दी-जुखाम होना सामान्य सी बात है।


















गैरमुस्लिम महिलाओं का हिजाब पर टिप्पणियाँ :- मुस्लिम महिलाओं को बुर्खे, नकाब या हिजाब पहने हुए देखने पर उनके प्रति बहुत सहानुभूती होती है। हिजाब पहने हुए किसी भी छोटी बच्ची पर जब नजर जाती है तो ऐसा लगता है की उनके अभिभावकों से पुँछू कि, "इतनी कम उम्र की बच्ची पर यौवन सुरक्षा या धर्म के नाम पर अंधविश्वास और कट्टरता थोंपने का क्या अर्थ है ?" हिजाब पहन कर नौकरी करनेवाली महिला जब भी नजर आती है तब उनके पिता, भाई या पति पर हमें बहुत शर्म आती है क्योंकि उनके लिए घर की औरतों को कामकाज के लिए गैरमर्दों के बीच भेजना तो जायज है किंतु हिजाब जैसी दकियानूसी प्रथा से शोषित हो रही घर की महिला का हिजाब ना पहनने का निर्णय नाजायज है।


 





आगे कुछ और दुनियाभर से #World No Hijab Day पर आये Comment's को देखते हैं। 


  • The hijab is not a fashion garment, it is a symbol of sharia and the death of young girls.
  • "Take It Off" as a sign of respect to the victims of honor killings.
  • Hijab is not a choice, it is forced on women.
  • Some religious experts are quite vocal that there is nothing in the quran about having to cover one's head or face in a veil. 
  • It can be a chore fighting to keep everything in place.
  • Especially in the western world the media often uses the hijab as symbol of oppression.  
  • Muslim girls must wear hijab at age of 9 but in Iran hijab is compulsory at the age of 7.
  • The 7 years old girls are the primary victims of forced hijab in Iran.
  • They have not even reached the age of puberty according to Sharia but they have to wear hijab.
  • Parents should take pictures and videos of their daughters to show how deep this injustice goes.
  • Hijab is the imposition of a specific religion rules on how to dress. It is a violation of human rights. 
  • It violates children's rights by imposing religious rules on them.
Writer :- Vikas Bounthiyal 
Edited by :- NA
Source of article :- Google, Wikipedia, Online Newspapers, self study on the basis of books and social sites.
Source of images :- Google non-copyrighted images
Length of the article :- 1760 Words (Calculated by wordcounter.net)

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