उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में एक अवैध पटाका निर्माण फैक्ट्री में विस्फोट - News Beyond The Media House

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Saturday, February 23, 2019

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में एक अवैध पटाका निर्माण फैक्ट्री में विस्फोट

          २३ फरवरी शनिवार की सुबह के लगभग ११ बजे से दोपहर के १२ बजे के बीच उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के अंतर्गत आनेवाले रोटहां गाँव के एक अवैध पटाखे की फैक्ट्री में विस्फोट हुआ जिसमे १२ लोगों की मौत हुई और कई गंभीर रूप से घायल हो गए। घटनास्थल से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी मुस्लिम था और जैसा की अक्सर पाया जाता है की प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत के चलते इस अवैध पटाखा फैक्ट्री को चलाया जा रहा था।  इरफ़ान मंसूर नामक एक २८ वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति अपने २० वर्षीय भाई आबिद के साथ इस अवैध पटाखे बनाने का कारखाना चलता था। यह कारखाना ठीक आरोपी के ही किराने और पटाखे की दुकान की ऊपरी मंजिल पर था। इसके आलावा इस कारखाने से ठीक सटकर दो अन्य मुस्लिम व्यक्ति मुदस्सिर की दुकान और शम्स आलम का मकान भी था।



          इस विस्फोट में हुआ धमाका इतना तेज था की इसकी गूँज घटनास्थल से पाँच-छह किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। कारखाने के ठीक सामने एक १० फीट ऊँची दीवार धराशाई होकर गिर गयी और एक हैण्डपम्प जमीं से उखड गया जिससे ये अंदाजा लगाया जा सकता हैं की वहाँ कितनी अधिक मात्रा में विस्फोटक पदार्थ मौजूद रहा होगा। जानकारों की माने तो पटाको को बनाने में इस्तेमाल होनेवाले बारूद में इतनी अधिक विस्फोटक क्षमता नहीं होती की तीन घरों को धराशायी कर दे इसलिए इस विस्फोट को बम धमाके से जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ लोगों द्वारा इस विस्फोट को हाल ही हुए पुलवामा घटना से भी जोड़ा जा रहा है।
          चश्मदीदों की माने तो विस्फोट का धमाका इतना जबरदस्त था की घटनास्थल से लगभग पाँच किलोमीटर दूर स्थित एक वाहनों के आवागमन के पूल पर लोग डर के मारे अपनी गाड़ियाँ पूल पर ही खड़ी करके धमाके के कारणों का पता लगाने में जुट गए। कुछ तमाशबीन किस्म के लोग तो घटनास्थल पर ही पहुँच गए। विस्फोट की आवाज इतनी तीव्र थी जिसके कारण लोग अपने निजी वाहन लेकर दूर-दूर से आने लगे। धमाके के क्षण एक मोटरसाइकिल सवार पटके की दुकान के सामने से गुजर रहा था जिससे अचानक हुए विस्फोट में वो उसकी चपेट में आ गया। इस विस्फोट में मोटरसाइकिल के परखच्चे उस गए किन्तु अभी तक मोटरसाइकिल चालक का कुछ पता नहीं चला है। विस्फोट के कारण घटनास्थल के ४-५ सौ मीटर की   दीवारों में भी दरारे पाई गयी और कई घरों के शीशे की खिड़किया चटक गए। विस्फोट में मारे गए लोगों के भी अंग घटनास्थल के ४०० मीटर दायरे में उखाड़कर बिखरे पड़े थे। एक व्यक्ति का पाँव भी घटनास्थल से कुछ दूरी पर पाया गया जिससे लोगों में खासकर बच्चों  दहशत फैल गयी। आसपास के कई दुकानों के लोहे के शटर व ग्रील के दरवाजे भी इस धमाके की वजह से उखड और मूड गए।
          घटनास्थल से प्राप्त जानकारी के मुताबिक विस्फोट हो जाने के एक घंटे बाद तक भी कोई पुलिसकर्मी  या दमकल की गाडी मौके पर नहीं पहुँची जिसके कारण स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर ही बचाव कार्य शुरू कर दिया। पटाखों का यह कारखाना गाँव के अतिव्यस्त बाजार से लगकर ही था। स्थानीय लोगों ने तुरंत ही मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू कर दिया और प्रशासन के अधिकारियों के पहुँचने से पहले चार लाशों को विस्फोट के मलबे से बहार निकल लिया। एक घंटे बाद पहुँची पुलिस और दमकल के लोगों ने आगे का राहत कार्य शुरू किया।
          पुलिस और अग्निशमन के पहुँचने के कुछ देर बाद बाद SSP डॉ. संजय कुमार भी घटनास्थल पर पहुँचे और आनन-फानन में जाँच कार्य शुरू हुआ। स्थिती की गंभीरता को देखते हुए मौके पर NDRA की Team और CRPF के जवान पहुँच गए और बम धमाके की आशंका के चलते किसी भी विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए बमनिरोधी दस्तों को भी घटनास्थल पर भेजा गया और किसी तरह राहत और बचाव कार्य शुरू हो सका। घायलों को नजदिकी सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया और मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। बता दे की इस भयानक विस्फोट में २८ वर्षीय आरोपी इरफ़ान मंसूरी उसके २० वर्षीय छोटे भाई आबिद समेत अन्य १० लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी। इसके आलावा अब तक कुल ३ लोगों के घायल होने के समाचार मिले हैं। मरनेवालों की संख्या बढ़ने की भी आशंका जताई  रही है। बताया जा रहा है की मरनेवाले कालीन बनानेवाले मजदूरों में से अधिकतर लोग एक दिन पहले ही पश्चिम बंगाल से यहाँ आये थे।
          घटनास्थल से मिली जानकारी के अनुसार विस्फोट के समय पटाखे फैक्ट्री से लगकर ही एक अन्य मुस्लिम व्यक्ती अख्तर अली का कालीन बुनाई का कारखाना भी था जिसमें कुल १२ कालीन बुनकर समेत कालीन की काती लेने आये  ४२ वर्षीय अर्जुनपुर निवासी सलीम और वेल्डिंग का काम करने आया एक अन्य व्यक्ति भी मौजूद था। किन्तु अभी तक १४ लोगों में केवल दोनों आरोपी भाइयों समेत १० कालीन बुनकरों के ही शव मलबों से मिले हैं जिससे आशंका ये लगायी जा रही है की कालीन की काती लेने आया सलीम काती लेकर चला गया होगा और वेल्डिंग का काम करने आया दूसरा युवक भी अपना काम करके चला गया होगा किन्तु यदि दुर्भाग्यवश वे दोनों विस्फोट के समय वहाँ रहे हो तो उनके जीवित बचने की संभावना लगभग नहीं के बराबर है।
       

          प्राप्त जानकारी के अनुसार कालीन बुनाई के कारखाने में काम कर रहे कारीगर अधिकतर पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से थे। इस पटाका फैक्ट्री से सटकर एक तरफ मुदस्सिर नामक व्यक्ति की दुकान और दूसरी तरफ शम्स आलम नामक व्यक्ति का मकान था। इस भयानक विस्फोट में पटाके के कारखाने समेत मुदस्सिर की दुकान और शम्स आलम का मकान दोनों धराशाई हो गया। मुदस्सिर के दुकान के सामने बैठीं मुदस्सिर की माँ फातिमा और उसका ढाई वर्षीय पोता नवाब यानी मुदस्सिर का बेटा और एक मालदा का रहनेवाला कालीन बुनकर विस्फोट की चपेट में आ गए। तीनों घायलों को पहले नजदीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती किया गया लेकिन मरीजों की गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें वाराणसी के सरकारी अस्पताल में रेफेर कर दिया।

        जहाँ एक ओर भदोही विस्फोट में मरनेवाले मुस्लिम आरोपी इरफ़ान मंसूर और आबिद दोनों आपस में सगे भाई थे वही संयोगवश मरनेवाले १० कालीन बुनकरों में से आजाद, आलम और कादिर भी आपस में सगे भाई ही थे। घटना के थोड़ी ही देर में डीएम राजेंद्र प्रसाद, एसपी (पुलिस अधिक्षक) राजेश एस के अलावा मिर्जापुर डीआईजी पीयूष श्रीवास्तव भी मौके पर पहुंच गए। दोपहर बाद एडीजी वाराणसी पीवी रामाराव शास्त्री भी घटनास्थल पर पहुंचे। शवों को पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया। जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि विस्फोट कैसे हुआ इसकी जाँच कराई जा रही है। तहकीकात के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि ये विस्फोट कैसे हुआ। उधर घायल बुनकर शहंशाह(20) को वाराणसी के बीएचयू ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया है। जहां उसका इलाज चल रहा है।

अब तक की जानकारी के अनुसार विस्फोट में मरनेवाले लोगों के नाम और उम्र कुछ इस प्रकार है :- 

इरफान मंसूरी (28), आबिद (20), कलाम (38), गफ्फार (25), आजाद (28), आलम (23), कादिर (22),  इसराफिल (24), अताउर (42), मुसव्वर (23), सलीम (42), शुबहान (25) आदि की इस विस्फोट में मौत हो गई है और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। 
          उक्त घटना में जांच के दायरे में कई विभाग आ रहे हैं। माना जा रहा है कुछ और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। वहीं दूसरी ओर अग्निशमन विभाग भी पुलिस महकमे से कम दोषी नहीं माना जा रहा है। चौरी समेत अन्य क्षेत्रों में खुलेआम बारूद और पटाखा के फैले कारोबार के पीछे खाकी के साथ अग्निशमन विभाग के अधिकारी भी लापरवाही के लिए जिम्मेदार माने जा रहे हैं।
          वही आरोप-प्रत्यारोप के दौर में पुलिस अधिक्षक राजेश एस ने चौरी थानाध्यक्ष अजय सिंह और चौकी प्रभारी प्रमोद कुमार को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही पूर्व चौरी थानाध्यक्ष  प्रदीप कुमार को भी निलंबित कर दिया गया है। बताया जा रहा है की यदि चौरी थाना के पुलिसकर्मियों के संज्ञान में अवैध पटके कारखाने की जानकारी होने की स्थिती में पूर्व चौरी थानाध्यक्ष दीप कुमार भी दोषी। पूर्व चौरी थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार वर्त्तमान में ऊंज के थानाध्यक्ष है। 

          अवैध पटाखे का व्यापार का जाल पूरे उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है और जो बिना पुलिस और दमकल अधिकारियों के मिलीभगत के संभव नही। अत: अब जाँच के घेरे मे पुलिस अधिकारी, दमकल विभाग एंव प्रशासन के अधिकारी भी आ गये है। उम्मीद है की उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इस घटना की निष्पक्ष जाँच कर ऐसे अवैध कारोबार पर उचित कदम उठाएगी और राज्य में मुसलमानों  द्वारा चल रहे घातक प्रयोगों पर नकेल कसने मे सक्षम साबित होगी।

Writer :- Vikas Bounthiyal
Edited by :- NA
Source of article :- UP News 
Source of images :- Self Clicks
Length of the article :1436 Words (Calculated by wordcounter.net)

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